Tuesday, April 12, 2016

तुलसी : लिवर (यकृत),हृदय रोग,आंखों की समस्या,शीघ्र पतन एवं वीर्य की कमी

तुलसी एक दिव्य पौधा   

भारतीय संस्कृति में तुलसी के पौधे का बहुत महत्व है और इस पौधे को बहुत पवित्र माना जाता है। ऎसा माना जाता है कि जिस घर में तुलसी का पौधा नहीं होता उस घर में भगवान भी रहना पसंद नहीं करते। माना जाता है कि घर के आंगन में तुलसी का पौधा लगा कलह और दरिद्रता दूर करता है। इसे घर के आंगन में स्थापित कर सारा परिवार सुबह-सवेरे इसकी पूजा-अर्चना करता है। यह मन और तन दोनों को स्वच्छ करती है। इसके गुणों के कारण इसे पूजनीय मानकर उसे देवी का दर्जा दिया जाता है। तुलसी केवल हमारी आस्था का प्रतीक भर नहीं है। इस पौधे में पाए जाने वाले औषधीय गुणों के कारण आयुर्वेद में भी तुलसी को महत्वपूर्ण माना गया है। भारत में सदियों से तुलसी का इस्तेमाल होता चला आ रहा है।

तुल्सी से उपचार
  * लिवर (यकृत) संबंधी समस्या: तुलसी की 10-12 पत्तियों को गर्म पानी से धोकर रोज सुबह खाएं। लिवर की समस्याओं में यह बहुत फायदेमंद है।
* पेटदर्द होना: एक चम्मच तुलसी की पिसी हुई पत्तियों को पानी के साथ मिलाकर गाढा पेस्ट बना लें। पेटदर्द होने पर इस लेप को नाभि और पेट के आस-पास लगाने से आराम मिलता है।
* पाचन संबंधी समस्या : पाचन संबंधी समस्याओं जैसे दस्त लगना, पेट में गैस बनना आदि होने पर एक ग्लास पानी में 10-15 तुलसी की पत्तियां डालकर उबालें और काढा बना लें। इसमें चुटकी भर सेंधा नमक डालकर पीएं।
* बुखार आने पर : दो कप पानी में एक चम्मच तुलसी की पत्तियों का पाउडर और एक चम्मच इलायची पाउडर मिलाकर उबालें और काढा बना लें। दिन में दो से तीन बार यह काढा पीएं। स्वाद के लिए चाहें तो इसमें दूध और चीनी भी मिला सकते हैं।
* खांसी-जुकाम : करीब सभी कफ सीरप को बनाने में तुलसी का इस्तेमाल किया जाता है। तुलसी की पत्तियां कफ साफ करने में मदद करती हैं। तुलसी की कोमल पत्तियों को थोडी- थोडी देर पर अदरक के साथ चबाने से खांसी-जुकाम से राहत मिलती है। चाय की पत्तियों को उबालकर पीने से गले की खराश दूर हो जाती है। इस पानी को आप गरारा करने के लिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
* सर्दी से बचाव : बारिश या ठंड के मौसम में सर्दी से बचाव के लिए तुलसी की लगभग 10-12 पत्तियों को एक कप दूध में उबालकर पीएं। सर्दी की दवा के साथ-साथ यह एक न्यूट्रिटिव ड्रिंक के रूप में भी काम करता है। सर्दी जुकाम होने पर तुलसी की पत्तियों को चाय में उबालकर पीने से राहत मिलती है। तुलसी का अर्क तेज बुखार को कम करने में भी कारगर साबित होता है।
* श्वास की समस्या : श्वास संबंधी समस्याओं का उपचार करने में तुलसी खासी उपयोगी साबित होती है। शहद, अदरक और तुलसी को मिलाकर बनाया गया काढ़ा पीने से ब्रोंकाइटिस, दमा, कफ और सर्दी में राहत मिलती है। नमक, लौंग और तुलसी के पत्तों से बनाया गया काढ़ा इंफ्लुएंजा (एक तरह का बुखार) में फौरन राहत देता है।
* गुर्दे की पथरी : तुलसी गुर्दे को मजबूत बनाती है। यदि किसी के गुर्दे में पथरी हो गई हो तो उसे शहद में मिलाकर तुलसी के अर्क का नियमित सेवन करना चाहिए। छह महीने में फर्क दिखेगा।
* हृदय रोग : तुलसी खून में कोलेस्ट्राल के स्तर को घटाती है। ऐसे में हृदय रोगियों के लिए यह खासी कारगर साबित होती है।
* तनाव : तुलसी की पत्तियों में तनाव रोधीगुण भी पाए जाते हैं। तनाव को खुद से दूर रखने के लिए कोई भी व्यक्ति तुलसी के 12 पत्तों का रोज दो बार सेवन कर सकता है।
* मुंह का संक्रमण : अल्सर और मुंह के अन्य संक्रमण में तुलसी की पत्तियां फायदेमंद साबित होती हैं। रोजाना तुलसी की कुछ पत्तियों को चबाने से मुंह का संक्रमण दूर हो जाता है।
* त्वचा रोग : दाद, खुजली और त्वचा की अन्य समस्याओं में तुलसी के अर्क को प्रभावित जगह पर लगाने से कुछ ही दिनों में रोग दूर हो जाता है। नैचुरोपैथों द्वारा ल्यूकोडर्मा का इलाज करने में तुलसी के पत्तों को सफलता पूर्वक इस्तेमाल किया गया है।
तुलसी की ताजा पत्तियों को संक्रमित त्वचा पर रगडे। इससे इंफेक्शन ज्यादा नहीं फैल पाता।
* सांसों की दुर्गध : तुलसी की सूखी पत्तियों को सरसों के तेल में मिलाकर दांत साफ करने से सांसों की दुर्गध चली जाती है। पायरिया जैसी समस्या में भी यह खासा कारगर साबित होती है।
* सिर का दर्द : सिर के दर्द में तुलसी एक बढि़या दवा के तौर पर काम करती है। तुलसी का काढ़ा पीने से सिर के दर्द में आराम मिलता है।
* आंखों की समस्या : आंखों की जलन में तुलसी का अर्क बहुत कारगर साबित होता है। रात में रोजाना श्यामा तुलसी के अर्क को दो बूंद आंखों में डालना चाहिए।
* कान में दर्द : तुलसी के पत्तों को सरसों के तेल में भून लें और लहसुन का रस मिलाकर कान में डाल लें। दर्द में आराम मिलेगा।
* ब्लड-प्रेशर को सामान्य रखने के लिए तुलसी के पत्तों का सेवन करना चाहिए।
*मासिक धर्म में अनियमियता: जिस दिन मासिक आए उस दिन से जब तक मासिक रहे उस दिन तक तुलसी के बीज 5-5 ग्राम सुबह और शाम पानी या दूध के साथ लेने से मासिक की समस्या ठीक होती है और जिन महिलाओ को गर्भधारण में समस्या है वो भी ठीक होती है
*शीघ्र पतन एवं वीर्य की कमी: तुलसी के बीज 5 ग्राम रोजाना रात को गर्म दूध के साथ लेने से समस्या दूर होती है
* तुलसी के पांच पत्ते और दो काली मिर्च मिलाकर खाने से वात रोग दूर हो जाता है।
* कैंसर रोग में तुलसी के पत्ते चबाकर ऊपर से पानी पीने से काफी लाभ मिलता है।
* तुलसी तथा पान के पत्तों का रस बराबर मात्रा में मिलाकर देने से बच्चों के पेट फूलने का रोग समाप्त हो जाता है।
* तुलसी का तेल विटामिन सी, कैल्शियम और फास्फोरस से भरपूर होता है।
* तुलसी का तेल मक्खी- मच्छरों को भी दूर रखता है।
* बदलते मौसम में चाय बनाते हुए हमेशा तुलसी की कुछ पत्तियां डाल दें। वायरल से बचाव रहेगा।
* शहद में तुलसी की पत्तियों के रस को मिलाकर चाटने से चक्कर आना बंद हो जाता है।
* तुलसी के बीज का चूर्ण दही के साथ लेने से खूनी बवासीर में खून आना बंद हो जाता है।
* तुलसी के बीजों का चूर्ण दूध के साथ लेने से नपुंसकता दूर होती है और यौन-शक्ति में वृध्दि होती है।
रोज सुबह तुलसी की पत्तियों के रस को एक चम्मच शहद के साथ मिलाकर पीने से स्वास्थ्य बेहतर बना रहता है। तुलसी की केवल पत्तियां ही लाभकारी नहीं होती। तुलसी के पौधे पर लगने वाले फल जिन्हें अमतौर पर मंजर कहते हैं, पत्तियों की तुलना में कहीं अघिक फायदेमंद होता है। विभिन्न रोगों में दवा और काढे के रूप में तुलसी की पत्तियों की जगह मंजर का उपयोग भी किया जा सकता है। इससे कफ द्वारा पैदा होने वाले रोगों से बचाने वाला और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने वाला माना गया है। किंतु जब भी तुलसी के पत्ते मुंह में रखें, उन्हें दांतों से न चबाकर सीधे ही निगल लें। इसके पीछे का विज्ञान यह है कि तुलसी के पत्तों में पारा धातु के अंश होते हैं। जो चबाने पर बाहर निकलकर दांतों की सुरक्षा परत को नुकसान पहुंचाते हैं। जिससे दंत और मुख रोग होने का खतरा बढ़ जाता है।
तुलसी का पौधा मलेरिया के कीटाणु नष्ट करता है। नई खोज से पता चला है इसमें कीनोल, एस्कार्बिक एसिड, केरोटिन और एल्केलाइड होते हैं। तुलसी पत्र मिला हुआ पानी पीने से कई रोग दूर हो जाते हैं। इसीलिए चरणामृत में तुलसी का पत्ता डाला जाता है। तुलसी के स्पर्श से भी रोग दूर होते हैं। तुलसी पर किए गए प्रयोगों से सिद्ध हुआ है कि रक्तचाप और पाचनतंत्र के नियमन में तथा मानसिक रोगों में यह लाभकारी है। इससे रक्तकणों की वृद्धि होती है
‪‎हल्‬‍दी वाला दूध पीने के 7 लाभ
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बहुत फायदेमंद हैं हल्‍दी वाला दूध। दूध जहां कैल्शियम से भरपूर होता है वहीं दूसरी तरफ हल्‍दी में एंटीबायोटिक होता है। दोनों ही आपके स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुत लाभकारी होते हैं। और अगर दोनों को एक साथ मिला लिया जाये तो इनके लाभ दोगुना हो जायेगें। आइए हल्‍दी वाले दूध के ऐसे फायदों को जानकर आप इसे पीने से खुद को रोक नहीं पायेगें ।
1.सांस संबंधी समस्‍याओं में लाभकारी
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हल्दी में एंटी-माइक्रोबियल गुण होते है, इसलिए इसे गर्म दूध के साथ लेने से दमा, ब्रोंकाइटिस, फेफड़ों में कफ और साइनस जैसी समस्याओं में आराम होता है। यह मसाला आपके शरीर में गरमाहट लाता है और फेफड़े तथा साइनस में जकड़न से तुरन्त राहत मिलती है। साथ ही यह बैक्टीरियल और वायरल संक्रमणों से लड़ने में मदद करता है
2. मोटापा कम करें
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हल्दी वाले दूध को पीने से शरीर में जमी अतिरिक्त चर्बी घटती है। इसमें मौजूद कैल्शियम और मिनिरल और अन्‍य पोषक तत्व वजन घटाने में मदगार होते है।
3. हडि्डयों को मजबूत बनाये
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दूध में कैल्शियम और हल्दी में एंटीऑक्सीडेंट की मौजूदगी के कारण हल्दी वाला दूध पीने से हडि्डयां मजबूत होती है और साथ ही शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। हल्दी वाले दूध को पीने से हड्डियों में होने वाले नुकसान और ऑस्टियोपोरेसिस की समस्‍या में कमी आती है । 
4. खून साफ करें
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आयुर्वेदिक परम्‍परा में हल्‍दी वाले दूध को एक बेहतरीन रक्त शुद्ध करने वाला माना जाता है। यह रक्त को पतला कर रक्त वाहिकाओं की गन्दगी को साफ करता है। और शरीर में रक्त परिसंचरण को मजबूत बनाता है।
5. पाचन संबंधी समस्‍याओं में लाभकारी
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हल्‍दी वाला दूध एक शक्तिशाली एंटी-सेप्टिक होता है। यह आंतों को स्‍वस्‍थ बनाने के साथ पेअ के अल्‍सर और कोलाइटिस के उपचार में भी मदद करता है। इसके सेवन से पाचन बेहतर होता है और अल्‍सर, डायरिया और अपच की समस्‍या नहीं होती है।
6. दर्द कम करें
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हल्दी वाले दूध के सेवन से गठिया का निदान होता हैं। साथ ही इसका रियूमेटॉइड गठिया के कारण होने वाली सूजन के उपचार के लिये प्रयोग किया जाता है। यह जोड़ो और मांसपेशियों को लचीला बनाता हकै जिससे दर्द कम हो जाता है
7. गहरी नींद में सहायक
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हल्‍दी शरीर में ट्रीप्टोफन नामक अमीनो अम्ल को बनाता है जो शान्तिपूर्वक और गहरी नींद में सहायक होता है। इसलिए अगर आप रात में ठीक से सो नहीं पा रहें है या आपको बैचेनी हो रही है तो सोने से आधा घंटा पहले हल्दी वाला दूध पीएं। इससे आपको गहरी नींद आएगी और नींद ना आने की समस्या दूर हो जाएगी।

माजूफल : श्वेतप्रदर,रक्तप्रदर, पायरिया, अंडकोष के रोग,आंखों की खुजली

माजूफल के औष्धीय प्रयोग

विभिन्न रोगों में सहायक :

1. बवासीर में दर्द का होना और मलद्वार का निकलना: 1 गिलास पानी में माजूफल पीसकर डालें और 10 मिनट तक उबाल लें, ठंडी होने के बाद इससे मलद्वार को धोयें। इससे मलद्वार का बाहर निकलना और बवासी
र का दर्द दूर होता है।

2. अंडकोष के रोग: 12 ग्राम माजूफल और 6 ग्राम फिटकरी को पानी में पीसकर अंडकोष पर लेप करें। 15 दिन लेप करने से अण्डकोषों में भरा पानी सही हो जाता है।

3. अंडकोष की सूजन: 10-10 ग्राम माजूफल और असगंध लेकर पानी के साथ पीस लें, फिर इसे थोड़ा-सा गर्म करके अण्डकोष पर बांधें। इससे अंडकोष की सूजन मिट जाती है।

4. दांतों का दर्द: 1 माजूफल एवं 1 सुपाड़ी को आग पर भून लें तथा 1 कच्चे माजूफल के साथ मिलाकर बारीक पाउडर बनाकर मंजन बना लें। इससे रोजाना 2 बार मंजन करने से दांतों का दर्द ठीक हो जाता है।
फिटकरी को फुला लें। माजूफल और हल्दी के साथ फूली हुई फिटकरी को बराबर मात्रा में मिलाकर बारीक पीसकर पाउडर बना लें। इससे मंजन करने पर दांतों की पीड़ा शांत होती है।
दांतों में तेज दर्द होने पर माजूफल को पीसकर दांतों के नीचे दबाकर रखें। इससे तेज दर्द में जल्द आराम मिलता है तथा दांतों से खून का आना बंद हो जाता है।

5. आंखों की खुजली: माजूफल और छोटी हरड़ को पीसकर आंखों में लगाने से आंखों की खुजली समाप्त होती है।

6. मसूढ़ों का रोग: माजूफल को बारीक पीसकर और छानकर सुबह-शाम मसूढ़ों पर मालिश करने से मसूढ़ों के सारे रोग समाप्त हो जाते हैं।

7. दांतों से खून आना: दांतों से खून निकल रहा हो तो माजूफल को बारीक पीसकर मंजन बना लें। इससे मंजन करने से दांतों से खून का निकलना बंद हो जाता है।

8. दांत मजबूत करना: 5 ग्राम माजूफल, 4 ग्राम भुनी फिटकरी, सफेद कत्था 6 ग्राम और 1 ग्राम नीलाथोथा भुना हुआ को बारीक पीसकर मंजन बना लें। इससे रोजाना मंजन करने से दांत मजबूत होते हैं।

9. दांतों में ठंडी लगना: माजूफल को बारीक पीसकर मंजन बना लें। इसे दांतों में लगाने से दांतों में पानी का लगना और खून निकलना बंद हो जाता है तथा दांत मजूबत होते हैं।

10. पायरिया: 20 ग्राम माजूफल, 1 ग्राम पोटेशियम परमैगनेट और 30 ग्राम पांचों नमक को मिलाकर बारीक पाउडर बना लें। इसके पाउडर से मंजन करने से पायरिया रोग दूर हो जाता है।
माजूफल के चूर्ण का दांतों पर मंजन करने से मुंह व मसूढ़ों के घाव एवं मसूढ़ों से खून का निकलना बंद होता है तथा पायरिया रोग में लाभ मिलता है।

11. कांच निकलना (गुदाभ्रंश): 2 ग्राम भुनी फिटकरी को 2 माजूफल के साथ पीसकर 100 ग्राम पानी में मिलाकर घोल बना लें। इस घोल में रूई को भिगोकर गुदा पर लगाएं और गुदा को अन्दर कर लंगोट बांध दें। लगातार 4-5 दिन तक इसका प्रयोग करने से गुदाभ्रंश (कांच निकलना) बंद हो जाता है।
माजूफल और फिटकरी का पाउडर बनाकर गुदा पर छिड़कने से दर्द में आराम आता है।
1 गिलास पानी में 2 माजूफल को पीसकर डालें और आग पर उबाल लें। ठंडी होने पर उस पानी से मलद्वार को धोने से गुदा का बाहर आना बंद हो जाता है।
10-10 ग्राम माजूफल, फिटकरी तथा त्रिफला चूर्ण को लेकर पानी में भिगो दें। 1 से 2 घंटे भिगोने के बाद पानी को कपड़े से छानकर मलद्वार को धोने से गुदाभ्रंश ठीक हा जाता है।

12. गर्भधारण: 60 ग्राम माजूफल को पीसकर छान लें। इसे 10-10 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम मासिक-धर्म समाप्त होने के बाद 3 दिनों तक गाय के दूध से सेवन करना चाहिए। इससे गर्भ स्थापित होता है।

13. मुंह के छाले: माजूफल के टुकड़े को सुपारी की तरह चबाते रहने से मुंह के छाले और दाने आदि खत्म हो जाते हैं।
5-5 ग्राम माजूफल, कत्था, वंशलोचन तथा छोटी इलायची के दाने लेकर पीसकर और छानकर चूर्ण बना लें। इस 1 चुटकी चूर्ण को बच्चे के मुंह में सुबह-शाम छिड़कने से बच्चों के मुंह के छाले खत्म हो जाते हैं।

14. मुंह का रोग: 10 ग्राम माजूफल, 10 ग्राम फिटकरी और 10 ग्राम कत्था को पीसकर व कपड़े में छानकर चूर्ण बना लें। रोजाना 2 से 3 बार इस चूर्ण को मुंह में छिड़कने से मुंह के रोगों में आराम मिलता है।

15. दस्त: माजूफल को घिसकर या पीसकर बने चूर्ण को 3 से 6 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम खुराक के रूप में सेवन करने से अतिसार (दस्त) में लाभ मिलता है।

16. कान का बहना: 5 ग्राम माजूफल को पीसकर और कपड़े में छानकर 50 ग्राम शराब में मिला लें। इसकी 2-2 बंदे कान को साफ करके सुबह-शाम डालने से कान से मवाद बहना बंद होता है।
माजूफल को बारीक पीसकर सिरके में डालकर उबाल लें। उबलने के बाद इसे छानकर कान में डालने से कान में से मवाद बहना बंद हो जाता है।

17. घाव: माजूफल को जलाकर उसकी राख एकत्र कर लें। इस राख को कपड़े से छानकर घाव पर छिड़कने से घाव ठीक हो जाता है।
माजूफल को पानी में पीसकर घाव पर पट्टी बांधने से लाभ मिलता है। इससे घाव जल्दी ठीक हो जाता है और घाव से खून भी आना बंद हो जाता है।
माजूफल को पीसकर और छानकर पानी में पीसकर घाव पर लगाकर पट्टी बांध लें। इससे खून बहना बंद हो जायगा, घाव भी भर जाएगा और हड्डी भी जुड़ जाती है।

18. श्वेतप्रदर:
 1-2 ग्राम की मात्रा में माजूफल का चूर्ण ताजे पानी के साथ सुबह-शाम सेवन करने से श्वेतप्रदर ठीक हो जाता है।

19. रक्तप्रदर: 25 ग्राम माजूफल को लेकर 200 ग्राम पानी में मिलाकर काढ़ा बना लें। फिर उसमें 3-3 ग्राम रसौत, फिटकरी मिलाकर योनि को साफ करने से रक्तप्रदर में लाभ मिलता है।

20. नकसीर: माजूफल को पीसकर और किसी कपड़े में छानकर नाक से सूंघने से नकसीर (नाक से खून बहना) ठीक हो जाती है।

21. तंग योनि को शिथिल करना: 10 ग्राम माजूफल को पीसकर रख लें, फिर इसमें आधा ग्राम कपूर का चूर्ण और शहद मिलाकर योनि पर लगायें। इससे योनि शिथिल (ढीली) हो जाती है।

22. योनि का दर्द: माजूफल को पानी के साथ पीसकर लुगदी बना लें। फिर इसमें रूई को भिगोकर स्त्री की योनि में संभोग (सहवास) करने से पहले रख दें, इसके बाद संभोग करने से योनि में दर्द नहीं होता हैं। ध्यान रहे कि इसका प्रयोग गर्भ को रोकने के लिए भी प्रयोग किया जाता है, इसलिए सोच समझकर ही इस्तेमाल करें।

23. योनि का संकोचन: माजूफल, शहद और कपूर को एक साथ पीसकर मिला लें, फिर इसे अंगुली की मदद से योनि में लगाने से योनि संकुचित हो जाती है।
माजूफल, धाय के फूल, फिटकरी को पीसकर बेर के आकार की गोली बनाकर योनि के अन्दर रखने से योनि छोटी हो जाती है।

24. होठ को पतला करना: माजूफल को पीसकर दूध या पानी में पीसकर रात को सोते समय होठों पर लगातार 1 सप्ताह तक लगाने से होठ पतले हो जाते हैं।

दालचीनी :क्षयरोग(टी.बी.),दंतशूल व दंतकृमि,त्वचा विकार,मधुमेह

दालचीनी के औषधीय प्रयोग

भारत में दालचीनी के वृक्ष हिमालय तथा पश्चिमी तट पर पाये जाते हैं। इस वृक्ष की छाल, दालचीनी के नाम से प्रसिद्ध है।

यह रस में तीखी, कड़वी तथा मधुर होती है। उष्ण-तीक्ष्ण होने के कारण दीपन, पाचन और विशेष रूप से कफ का नाश करने वाली है। यह अपने मधुर रस से पित्त का शमन और उष्णवीर्य होने से वात का शमन करती है। अतः त्रिदोषशामक है।

सावधानीः दालचीनी उष्ण-तीक्ष्ण तथा रक्त का उत्क्लेश करने वाली है अर्थात् रक्त में पित्त की मात्रा बढ़ानेवाली है। इसके अधिक सेवन से शरीर में गरमी उत्पन्न होती है। अतः गरमी के दिनों में इसका लगातार सेवन न करें। इसके अत्यधिक उपयोग से नपुंसकता आती है।

औषधि-प्रयोगः

मुँह के रोगः यह मुख की शुद्धि तथा दुर्गन्ध का नाश करने वाली है। अजीर्ण अथवा ज्वर के कारण गला सूख गया हो तो इसका एक टुकड़ा मुँह में रखने से प्यास बुझती है तथा उत्तम स्वाद उत्पन्न होता है। इससे मसूढ़े भी मजबूत होते हैं।

दंतशूल व दंतकृमिः इसके तेल में भिगोया हुआ रूई का फाहा दाँत के मूल में रखने से दंतशूल तथा दंतकृमियों का नाश होता है। 5 भाग शहद में इसका एक भाग चूर्ण मिलाकर दाँतों पर लगाने से भी दंतशूल में राहत मिलती है।

पेट के रोगः 1 चम्मच शहद के साथ इसका 1.5 ग्राम (एक चने जितनी मात्रा) चूर्ण लेने से पेट का अलसर मिट जाता है।

दालचीनी, इलायची और तेजपत्र को समभाग में लेकर मिश्रण करें। इसका 1 ग्राम चूर्ण 1 चम्मच शहद के साथ लेने से पेट के अनेक विकार जैसे मंदाग्नि, अजीर्ण, उदरशूल आदि में राहत मिलती है।

सर्दी, खाँसी, जुकामः दालचीनी का 1 ग्राम चूर्ण एवं 1 ग्राम सितोपलादि चूर्ण 1 चम्मच शहद के साथ लेने से सर्दी और खाँसी में तुरंत राहत मिलती है।

क्षयरोग(टी.बी.)- इसका 1 ग्राम चूर्ण 1 चम्मच शहद में मिलाकर सेवन करने से कफ आसानी से छूटने लगता है एवं खाँसी से राहत मिलती है। दालचीनी का यह सबसे महत्त्वपूर्ण उपयोग है।

रक्तविकार एवं हृदयरोगः दालचीनी रक्त की शुद्धि करने वाली है। इसका 1 ग्राम चूर्ण 1 ग्राम शहद में मिलाकर सेवन करने से अथवा दूध में मिलाकर पीने से रक्त में उपस्थित कोलेस्ट्रोल की अतिरिक्त मात्रा घटने लगती है। अथवा इसका आधा से एक ग्राम चूर्ण 200 मि.ली. पानी में धीमी आँच पर उबालें। 100 मि.ली. पानी शेष रहने पर उसे छानकर पी लें। इससे भी कोलेस्ट्रोल की अतिरिक्त मात्रा घटती है।

गर्म प्रकृति वाले लोग पानी व दूध मिश्रित कर इसका उपयोग कर सकते हैं। इस प्रयोग से रक्त की शुद्धि होती है एवं हृदय को बल मिलता है।

सामान्य वेदनाः इसका एक चम्मच (छोटा) चूर्ण 20 ग्राम शहद एवं 40 ग्राम पानी में मिलाकर स्थानिक मालिश करने से वात के कारण होने वाले दर्द से कुछ ही मिनटों में छुटकारा मिलता है।

इसका एक ग्राम चूर्ण और 2 चम्मच शहद व 1 कप गुनगुने पानी में मिलाकर नित्य सुबह-शाम पीने से संधिशूल में राहत मिलती है।

वेदनायुक्त सूज तथा सिरदर्द में इसका चूर्ण गरण पानी में मिलाकर लेप करें।

बिच्छू के दंशवाली जगह पर इसका तेल लगाने से दर्द कम होता है।

वृद्धावस्थाः बुढ़ापे में रक्तवाहिनियाँ कड़क और रुक्ष होने लगती हैं तथा उनका लचीलापन कम होने लगता है। एक चने जितना दालचीनी का चूर्ण शहद में मिलाकर नियमित सेवन करने से इन लक्षणों से राहत मिलती है। इस प्रयोग से त्वचा पर झुर्रियाँ नहीं पड़तीं, शरीर में स्फूर्ति बढ़ती है और श्रम से जल्दी थकान नहीं आती।

मोटापाः 1.5 ग्राम चूर्ण का काढ़ा बना लें। उसमें 1 चम्मच शहद मिलाकर सुबह खाली पेट तथा सोने से पहले पियें। इससे मेद कम होता है।

त्वचा विकारः दालचीनी का चूर्ण और शहद समभाग में लेकर मिला लें। दाद, खाज तथा खुजलीवाले स्थान पर उसका लेप करने से कुछ ही दिनों में त्वचा के ये विकार मिट जाते हैं।

सोने से पूर्व इसका 1 चम्मच चूर्ण 3 चम्मच शहद में मिलाकर मुँह की कीलों पर अच्छी तरह से मसलें। सुबह चने का आटा अथवा उबटन लगाकर गरम पानी से चेहरा साफ कर लें। इससे कील-मुँहासे मिटते हैं।

बालों का झड़नाः दालचीनी का चूर्ण, शहद और गरम ऑलिव्ह तेल 1-1 चम्मच लेकर मिश्रित करें और उसे बालों की जड़ों में धीरे-धीरे मालिश करें। 5 मिनट के बाद सिर को पानी से धो लें। इस प्रयोग से बालों का झड़ना कम होता है।

मधुमेह: दालचीनी मधुमेह को सन्तुलित करने के लिए एक प्रभावी ओषधि है, इसलिए इसे गरीब आदमी का इंसुलिन भी कहते हैं।

सेवन विधि:-

1 कप पानी में दालचीनी पाउडर को उबालकर, छानकर रोजाना सुबह पियें। इसे कॉफी में भी मिलाकर पी सकते हैं। इसे सेवन करने से मधुमेह में लाभ होगा। साथ ही इस बात का भी ख्‍याल रखें कि इसको बताई गई अल्प मात्रा में लें, इसे अधिक मात्रा में लेने से हानि हो सकती है।
रोज तीन ग्राम दालचीनी लेने से न केवल रक्त शर्करा की मात्रा कम होती है, बल्कि सही से भूख भी लगती है।
दालचीनी को पीसकर चाय में चुटकी भर मिलाकर रोज दिन में दो तीन बार पीएं। इससे मधुमेह की बीमारी में आराम मिलेगा। इसका ज्यादा सेवन करना उचित नहीं होता, इसलिए रोजाना थोड़ा-थोड़ा हीं सेवन करें।
दालचीनी और पानी के घोल के प्रयोग से रक्त में शर्करा के स्तर में कमी आ जाती है।
दालचीनी का सेवन करने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य करें। ऐसे लोग जिनका लीवर कमजोर है उन्‍हें ज्‍यादा मात्रा में दालचीनी नहीं खानी चाहिये।

वक्ष (breast) 👗 की सौंदर्यता 👸 को बढ़ती हुई उम्र के साथ बरक़रार रखने के लिए कारगर घरेलु उपाय

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• सुडौल व उन्नत वक्ष 👚👗 आपके सौन्दर्य में चार-चाँद 🌛🌛🌛🌛 लगा सकते है. इस बात में कोई दोराय नहीं है की सुन्दर एवम् सुडौल वक्ष प्रक्रति की देन है परन्तु फिर भी उनकी उचित देखभाल से इन्हें सुडौल व गठित बनाया जा सकता है। इससे आपके व्यक्तित्व में भी निखार आ जाता है। अधिकतर महिलाये अपने छोटे ब्रैस्ट को विकसित करना चाहती है उनके लिए दिए गये घरेलु नुस्खे काफी कारगर सिद्ध होंगे। अविकसित वक्ष न तो स्त्री को ही पसंद होते है न ही उनके पुरुष साथी को।
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• वक्षों का आकार सही न रहने के पीछे अनेक कारण हो सकते है, किसी लम्बी बीमारी से ग्रसित होने के कारण भी वक्ष बेडौल हो सकते है, इसके अलावा गर्भावस्था के दौरान तथा प्रसव के बाद भी स्तनों का बेडौल हो जाना एक आम बात है। ऐसी अवस्था में स्त्रियों के लिए उचित मात्रा में पौष्टिक व संतुलित आहार लेना अति आवश्यक हो जाता है। उनके भोजन में प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट, कैल्शियम, विटामिन्स, मिनरल्स तथा लौह तत्व भरपूर मात्रा में होने चाहिए. इसके साथ साथ ऐसी स्त्रियों को अपने स्तनों पर जैतुन का लगाकर मालिश करनी चाहिये। ऐसा करने से स्तनों में कसाव आ जाता है। मालिश करने की दिशा निचे से उपर की ओर होने चाहिए।
मालिश करने के बाद ठन्डे व ताज़े पानी से नहाना उचित रहेगा। ऐसा करने से न केवल वक्ष विकसित व सुडौल होने लगेंगे इसके अलावा आपके रक्त संचार की गति में भी तीव्रता आयगी।


▶वक्ष सौन्दर्य के लिए कुछ सरल उपाय व व्यायाम◀

1. सबसे पहले घुटनों के बल बैठ जाए और दोनों हाथों को सामने लाकर हथेलियों को आपस में मिलाकर पुरे बल से आपस में दबाएँ जिससे स्तनों की मांसपेशियों में खिंचाव होगा. फिर इसके बाद धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए अपनी हथेलियों को ढीला कर दें, इस प्रक्रिया को नियमित रूप से 10-15 बार करे। ( वक्षों को नहीं दबाना है )
2. इसके अलावा दोनों हाथों को सामने की ओर फैलाते हुए हथेलियों को दिवार से सटाकर पांच मिनट तक दीवारे पर दबाव डालें। ऐसा करने से वक्ष की मांसपेशियों में खिचांव होगा, जिससे वक्ष पुष्ट हो जायंगे।
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3. घुटनों के बल चौपाया बन जाए, फिर दोनों कोहनियों को थोडा-सा मोड़ते हुए शारीर के उपरी भाग को निचे की ओर झुकाएं। अपने शरीर का पूरा भार निचे की ओर डाले. तथा पुनः प्रथम अवस्था में आ जाए। इस व्यायाम को 6-8 बार दोहराएँ।
4. आप व्यायाम के अलावा एक नुस्खे को अपनाकर भी ढीले पड़े स्तनों में कसावट लाई जा सकती है। इसके लिए अनार के छिलकों को छाया में सुखा लें। फिर इन सूखे हुए छिलको का महीन (बारीक़) चूर्ण बना लें, अब इस चूर्ण को नीम के तेल में मिलाकर कुछ देर के लिए पका लें। फिर इसे कुछ देर ठंडा होने के लिए छोड़ दें, ठंडा हो जाने के बाद दिन में एक बार इस लेप को वक्षों पर लगायें और तकरीबन एक से दो घंटा लगे रहने के बाद इस लेप को सादे पानी से साफ़ कर लें। इसके नियमित उपयोग से कुछ दी दिनों में आपको लाभ अवश्य दिखने लगेगा।

🔹 जो स्त्रियाँ बच्चों 👯 को स्तनपान 🍼 कराती है उन स्त्रियों को अपने वक्षों को देख-रेख की ओर और अधिक ध्यान देने की आवश्कता होती है। क्युकि बच्चों को स्तनपान कराने से स्तनों में ढीलापन आ जाता है। इसके अलावा उनके लिए कुछ बातों की और ध्यान देना भी जरूरी होता है, उन्हें कभी भी बच्चों को लेटकर स्तनपान नहीं कराना चाहिए, हमेशा बैठकर ही बच्चों को दूध पिलाना चाहिए. साथ ही इस बात का भी विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए कि स्तनपान करने के लिए दोनों स्तनों का बारी-बारी से उपयोग करना चाहिए। ऐसा न करने से वक्षों के आकार में भिन्नता आ जाती है, जिससे आपके सम्पूर्ण सौन्दर्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

क्या आप गर्मी में पसीने की बदबू से परेशान है? तो अपनाए यह कारगर घरेलु उपाय

★ क्या आप गर्मी में पसीने की बदबू से परेशान है? तो अपनाए यह कारगर घरेलु उपाय ★


गर्मियों में पसीने की समस्या होना आम बात है। पसीना आना स्वस्थ शरीर की निशानी है। पसीने से शरीर का वेंटिलेशन होता है और जब पसीना सूख जाता है तब ताजगी का एहसास होता है। लेकिन पसीने का अधिक आना भी नुकसानदायक होता है। अधिक पसीने की वजह से सबसे बड़ी समस्या आती है तन की दुर्गंध। जिससे अक्सर लोग परेशान होते हैं। अधिक पसीने से बचने के लिए आप कुछ आसान प्राकृतिक घरेलू उपायों को अपना सकते हो।
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➡ क्या आहार लेना चाहिए? :
• रोज सुबह ग्रीन टी को पीएं। यह पसीने को कम करती है।
• दिन में रोज टमाटर का रस या सूप पीने से पसीने की दुर्गंध कम होती है।
• आप अंगूर, बादाम और स्ट्राबेरी का सेवन न करें यह पसीने को बढ़ाने का काम करते हैं।

➡ पसीने की बदबू को दूर करने के घरेलू उपाय :
1. आलू स्लाइस :
आलू को काटकर इसका स्लाइस बना लें और शरीर के जिस भाग में अधिक पसीना आता हो वहां पर इसे मलें। यह उपाय पसीना कम कर देता है।
2. बेकिंग सोडा :
नहाने की बाल्टी में एक चुटकी बेकिंग सोड़ा मिलाकर उस पानी से स्नान करें। ऐसा नियमित करने से पसीना नहीं आता है।
3. नींबू :
नहाने की टब या बाल्टी में कुछ बूंदे नींबू की डालें और इस पानी से नहाएं। यह भी आपको पसीने की समस्या से दूर रखता है।
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4. बेलपत्र :
शरीर पर बेलपत्र का लेप लगाने से पसीना नहीं आता है।
5. पानी :
जितना हो सकें पानी खूब पीएं। अधिक पानी पीने से पसीना तो निकलेगा ही लेकिन उससे आने वाली बदबू खत्म हो जाएगी।
6. तेजपत्ता :
तेजपत्तों को सुखा लें और इसे पीसकर इसका चूर्ण बना लें। अब पानी में इन पत्तों को उबाल लीजिए। और एक दिन ऐसे ही रहने दें। अब इस पानी से शरीर के उन हिस्सों की रोज सफाई करें जहां से पसीना अधिक निकलता है।
8. अन्य उपाय :
• नीम वाले साबुन से स्नान करे ।
• टाइट या तंग कपड़े पहनने से शरीर से अधिक पसीना आता है। इसलिए अधिक तंग कपड़े न पहनें।
• कड़ी धूप में जाने से बचें।
• ढीले और सूती कपड़े पहनें।
• सिंथेटिक कपड़ों को भी न पहनें।
• गर्मियों के मौसम में मिलने वाले फलों का सेवन करें।
• अधिक मसालेदार खाना-खाने से बचें।

रोजाना केवल 1 इलायची चबाने से होता है आपको ये अद्भुत फायदे

अगर आप हाइपरटेंशन के मरीज़ हैं, तो इलायची को अपनी डायट में ज़रूर शामिल करें 
हाइपरटेंशन के मरीज़ इस समस्या को अपनी जीवन शैली और खानपान में थोड़ा परिवर्तन करके कंट्रोल में कर सकते हैं। जाहिर है डॉक्टर भी इससे पीड़ित लोगों को दवा के अलावा अधिक सक्रिय जीवन जीने, एक्सरसाइज़ करने और अच्छा खाने-पीने की सलाह देते हैं। दरअसल ये एक ऐसी समस्या है, जो अन्य हृदय रोगों को निमंत्रण दे सकती है और आपको हार्ट अटैक का खतरा हो सकता है।
खानपान में बदलाव में जंक फ़ूड से बचना, नमक का कम सेवन और केवल घर पर बना खाना शामिल है। इस बदलाव से ना केवल आपको ब्लड प्रेशर लेवल कम करने में मदद मिलेगी बल्कि आपको स्वस्थ रहने और वजन कम करने में भी सहायता मिल सकती है। वैसे कई नेचुरल उपचारों के ज़रिये भी आपको ब्लड प्रेशर कम करने में मदद मिलती हैं। इन्ही उपचारों में से एक इलायची भी है।
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इलायची एक ऐसा सुगंधित और मीठा मसाला है, जो हर किसी के किचन में पाया जाता है। इसका इस्तेमाल विभिन्न प्रकार की सब्जियां, चावल आदि में स्वाद जोड़ने के लिए किया जाता है। लेकिन क्या आपको पता है कि इलायची के कई स्वास्थ्य लाभ भी होते हैं। पाचन को दुरुस्त रखने के अलावा इलायची ब्लड शुगर लेवल कम करने में भी मददगार है। एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर इलायची ब्लड प्रेशर कम करने में सहायक है। इसका हाइपरटेंशन के पहले स्टेज पर ज्यादा प्रभाव पड़ता है। इंडियन जर्नल ऑफ़ बायोकेमिस्ट्री एंड बायोफिज़िक्स में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, इलायची सिस्टोलिक और डायस्टोलिक को कम करने में सहायक है, इनसे ब्लड प्रेशर लेवल प्रभावित होता है।
इलायची का मिठाई में स्वाद बढ़ाने के लिए उपयोग किया जाता है। ध्यान रहे कि हाइपरटेंशन के मरीजों को मीठे और उच्च कोलेस्ट्रॉल खाद्य पदार्थों से परहेज करना चाहिए। इसलिए इसे अपने आहार में शामिल करने के सबसे आसान तरीका ये है कि आप नियमित रूप से इसका एक चुटकी पाउडर अपनी चाय में मिलाकर पिएं। इसके अलावा एक अन्य उपाय ये भी है कि आप खाने के बाद एक इलायची का दाना चबा सकते हैं।
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घरेलू विधि द्वारा निर्मित 📛 वैक्स से अनचाहे बालों को हटाये

वैक्सिंग : अनचाहे बालों को हटाने के लिए वैक्सिंग एक सर्वाधिक लोकप्रिय व अधिक उपयोग की जाने वाली विधि है. वैक्स का प्रयोग एक सरल तरीका है, इसके अलावा इससे कम समय में अधिक परिणाम पाया जा सकता है. परन्तु वैक्सिंग विधि का प्रयोग केवल बाहों व टांगों के बाल साफ़ करने के लिए करना ही अधिक उचित रहता है. इसका प्रयोग चेहरे पर नहीं करना चाहिये, चेहरे पर प्रयोग करने से झुर्रियों पड़ने का डर रहता है।

➡ वैक्स 📛 सामान्यत: दो प्रकार की होती है।

1. गर्म वैक्स  📛
2. ठंडी वैक्स 📛

 गर्म 🛁वैक्स को प्रयोग करने से पहले गर्म (पिंघलाना) करना पड़ता है. परन्तु ठंडी वैक्स जो ट्यूब में भरी हुई होती है, उसे बिना गर्म किये भी प्रयोग किया जा सकता है. ये दोनों ही तरह की वैक्स बाज़ार में उपलब्ध होती है. परन्तु आपके पास इससे बेहतर विकल्प है, आप घर पर ही एक उत्तम किस्म की वैक्स बना सकते है, जो बाज़ार में उपलब्ध वैक्स से बेहतर होती है. घरेलू सामग्री से बनाई हुई वैक्स पूरी तरह से सुरक्षित होती है इससे आपको किसी भी प्रकार की एलर्जी या त्वचा सम्बन्धी किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा. जो कई बार बाज़ार में उपलब्ध सौन्दर्य प्रसाधन का उपयोग करने पर होने की सम्भावना रहती है।

वैक्सिंग , Wax for Unwanted Hair in Hindi

➡ घरेलू विधि द्वारा निर्मित 📛 वैक्स :-

  1.  सबसे पहले तीन कप चीनी लें उसमे एक भाग निम्बू का रस, एक भाग सरसों का तेल तथा दो भाग पानी मिलाकर हलकी आंच पर कुछ देर के लिए पकाने के लिए रख दें. अब इसे लगभग आधे से पौनें घंटे तक पकाएं जब तक ये घोल भूरे रंग का न हो जायें, इसके बाद इसे आंच से उतार लें और इसमें थोड़ी ग्लिसरीन मिलाकर ठंडा होने के लिए छोड़ दें. फिर किसी डिब्बे में भरकर रख लें।

  2.  आप शहद का इस्तेमाल करके भी वैक्स बना सकती है. इसके लिए 5 बड़े चमच्च शहद में एक चमच्च निम्बू का रस मिला लें. अब इसे धिमी आंच पर लगभग आधे घंटे के लिए पकाएं. फिर आंच से उतार क्र थोड़ी-सी ग्लिसरीन मिलाकर ठंडा होने के लिए रख दे, और अन्त में किसी डिब्बे में डाल कर रख लें।

➡ वैक्सिंग 💁 करने की विधि :

वैक्सिंग के सन्दर्भ एक महत्वपूर्ण बात जो अवश्य ध्यान में रखनी चाहिये वो यह है कि वैक्सिंग करने के पहले अपने हाथ-पैरों को भलीं प्रकार से साफ़ कर लें. हाथ-पैर साफ़ करने के लिए आप क्लींजिंग मिल्क या कच्चे दूध का इस्तेमाल कर सकती है. इसके बाद साफ़ तौलिये से पौंछकर उस स्थान पर टेलकॉम पाउडर से हलकी-हलकी मालिश करें. यदि आपके बालों की जड़े अधिक सख्त या मोटी है तो ऐसे में पहले किसी coldcream का इस्तेमाल करें फिर टेलकॉम पाउडर से मालिश करें. ऐसा करने से बालों की जड़े नर्म हो जाती है. वैक्सिंग करने से पूर्व हाथ-पैरों को साफ़ करने से वैक्स अच्छे से हो जाती है, बाल आसानी से निकल जाते है।

घरेलू विधि द्वारा निर्मित वैक्स

वैक्स करने के लिए किसी छुरी का प्रयोग करें, परन्तु छुरी बिना धार वाली होनी चाहिये, इससे आपको नुकसान होने का खतरा नहीं होता. छुरी से गर्म वैक्स को बालों के ऊपर बालों की दिशा में लगायें, फिर उस पर सूती कपड़े की पट्टी लगायें, आप किसी पुरानी जिन्स को छोटे-छोटे आयताकार हिस्सों में काटकर भी प्रयोग कर सकती है. पट्टी को त्वचा पर भलीं प्रकार लगाये, इस तरह की पट्टी आपकी त्वचा पर अच्छे से चिपक जाए. अब पट्टी को बालों की जड़ों से विपरीत दिशा में खींचे. एक बात का ध्यान रखे की यदि आप पैरों पर वैक्स कर रहे है तो पट्टी खींचते समय उसके निचे के हिस्से को दूसरे हाथ से पकड़ ले, ताकि उपर वाले हिस्से पर त्वचा खींचे नहीं और वैक्स अच्छे से हो पाए. इसके अलावा त्वचा पर हलकी गर्म वैक्स का ही प्रयोग करे ध्यान रहे कि वैक्स अत्यधिक गर्म भी न हो, इसके लिए जिस डिब्बे में वैक्स रखी हो उसको गर्म पानी के बर्तन में रखना चाहिए. जिससे वैक्स पिंघली रहे।

🔷 एक और महत्वपूर्ण बात जिसका ध्यान रखना भी अति आवश्यक है, वो यह कि वैक्स सदैव एयरकंडिशंड कमरे में ही करे. क्यूंकि गरमियों में त्वचा पर हल्का हल्का पसीना रहता ही है जिससे कारण ठीक प्रकार से वैक्स नहीं हो पाती. कूलर या पंखे के निचे बैठकर भी वैक्स ठीक से नहीं हो पाती है इसके लिए कमरा ठीक प्रकार से ठंडा होना आवश्यक है

🔷 वैक्स करने के बाद हलके गुनगुने पानी में कुछ बूंद detol की डालकर त्वचा को साफ़ कर लेना चाहिए. ताकि त्वचा चिपचिपी न रहे. इसके बाद जैतुन के तेल अथवा गोले के तेल से त्वचा पर हलके हलके हाथों से मालिश करे ताकि त्वचा रुखी न रहकर कोमल हो जाए।